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Brahmayantra

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Fantasy

EP चार- Rahasyamayi Gatha! ब्रह्मयंत्र को पाने की सनक ने भानु को एक राक्षस बना दिया था और अब अपनी पत्नी के बाद उसने अपने बेटे की भी हत्या कर दी....

EP चार- Rahasyamayi Gatha! ब्रह्मयंत्र को पाने की सनक ने भानु को एक राक्षस बना दिया था और अब अपनी पत्नी के बाद उसने अपने बेटे की भी हत्या कर दी थी. अपने भाई, माँ और अपने पूरे खानदान की मौत से आहत नलिनी खुद के शरीर में विस्फोट कर सबकुछ नष्ट कर देना चाहती थी. लेकिन, उसके आह्वान के बाद भी ऐसा ना होने की वजह से वो अपने भाई के मृत शरीर को लेकर पहाड से कूद जाती है. उस पहाड से कूदने के बाद नलिनी की आंखे बंद हो रही थी. हवा को काटते हुए नीचे गिरती चली जा रही नलिनी अब सिर्फ चीजों को महसूस कर सकती थी. नलिनी का होश खो रहा था. अचानक नलिनी को लगता है, उसकी आत्मा उसके शरीर का साथ छोड रही है. नलिनी को अब सब कुछ महसूस होना बंद हो चुका था और वो चाहकर भी अपनी आंखों को नहीं खोल पा रही थी, ये मैं कहाँ जा रही हूं. मेरे चारों तरफ ये अजीब सन्नाटा क्यूँ है. मेरा भाई कहाँ गया. खुद से ही ये सवाल किए जा रहे नलिनी का मन और मस्तिष्क शून्य होता जा रहा था. नलिनी का मस्तिष्क अब पूरी तरह काम करना बंद कर चुका था और नलिनी एकदम शून्य हो जाती है. " मैं कहाँ हूँ. मुझे इतना अजीब क्यूँ महसूस हो रहा है. मेरा यहाँ दम घुट रहा है. थोडे समय के बाद जब नलिनी को होश आता है, तो अपनी आंखों को खोलने के साथ ही नलिनी को अब काफी अजीब महसूस हो रहा था. नलिनी को इस बात का एहसास था कि उसने अपनी आंखों को ज्यादा समय के लिए नहीं बंद किया था, लेकिन उसे लगता है इन दो चार पलों में ही उसने सैकडो साल जी लिए है. उसे कुछ भी ठीक महसूस नहीं हो रहा था. नलिनी को उस वक्त और भी ज्यादा अजीब लगता है, जब उसे अपना शरीर बदला बदला सा लगता है, मेरे हाथ पैर तो इतने पतले नहीं थे. ये मेरा शरीर अचानक इतना पतला कैसे हो गया है. मुझे तो मेरी शरीर की लंबाई भी छोटी लग रही है. ये मैं कहाँ आ गई हूँ और यहाँ इतना अंधेरा क्यूँ है. इन्हीं बातों को सोच नलिनी जब अपने हाथ को इधर उधर घुमाती हैं, तो उसे एहसास होता है कि वो किसी ताबूत में बंद है. ताबूत में बंद नलिनी की सांसें रुकने लगी थी. दम घुटने की वजह से नलिनी जोर जोर से खांसने लगती है और वो अपने हाथों से उस ताबूत को अंदर से खोलने की कोशिश भी कर रही थी. लेकिन, इसमें नाकामयाब रहने की वजह से वो उसे पीटना शुरू कर देती है. उधर दूसरी तरफ बंद पडे ताबूत के पास सिर्फ एक बूढी अम्मा बैठी हुई थी. उस ताबूत के सामने जल रहे दीये और उसके ऊपर चढाए गए फूलों से ऐसा महसूस हो रहा था, मानों वहाँ किसी की मृत्यु हुई है और उसके शरीर को ताबूत में रखा गया है. ताबूत के अंदर से आती आवाजों को सुन उस बूढी अम्मा का दिल घबराने लगता है, ये क्या हो रहा है. कहीं इसके अंदर भूत तो नहीं है. ताबूत के अंदर से आती आवाजों को सुनने की वजह से बूढी अम्मा को उसे खोलने में डर लग रहा था. लेकिन, अंदर से आ रही खांसने की आवाजों को सुन वो ताबूत को खोल देती है. ताबूत का दरवाजा खुलने के साथ ही नलिनी सबसे पहले तो खुलकर सांस लेती है. उधर, उसे देख सामने खडी बूढी अम्मा डर के मारे थोडी दूर जाकर गिर जाती है. सामने खडी अम्मा को इस तरह हैरान होते देख नलिनी कहती है, क्या हुआ अम्मा. आप मुझे देख हैरान क्यूँ हो रही हैं. मेरा भाई कहाँ गया. मेरा छोटा भाई कहाँ है. नलिनी अभी इन सवालों को कर ही रही थी कि तभी उसे ब्रह्मयंत्र का भी ख्याल आता है, ब्रह्मयंत्र कहाँ गया. ब्रह्मयंत्र को खुद के पास ना देख नलिनी की बेचैनी बढती ही जा रही थी. उधर थोडी ही दूर पर गिरी हुई अम्मा अभी भी नलिनी को घूरे जा रही थी. नलिनी को भी काफी अजीब महसूस हो रहा था. वह तुरंत ही खडी होकर ताबूत से बाहर निकलती है. ताबूत से बाहर निकलते ही नलिनी की नजर सामने रखे आईने पर पडती है. उस आईने में खुद का चेहरा देखते ही नलिनी की चीखें निकल जाती हैं, ये कौन है. ये मैं तो बिल्कुल नहीं हूँ. मैं कहाँ आ गई हूँ. ये मेरा शरीर नहीं है. छी ये लडकीं कितनी कमजोर है. नलिनी का शक सही साबित होता है और यह शरीर वास्तव में उसके पुराने शरीर से काफी अलग था. खुद को किसी और के शरीर में पाकर नलिनी को काफी ज्यादा अजीब महसूस हो रहा था. नलिनी का sir भी काफी भारी लग रहा था और उसके sir में भयानक दर्द भी था. नलिनी को यह समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे. तभी वहीं खडी अम्मा उसकी तरफ आती है और उसके दोनों हाथों को पकड कर कहती है, बेटी. बेटी नैना. तुम जिंदा हो. मुझे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा है कि तुम जिंदा हो. उन

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

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