
Bajrang Yodha
आधी रात की सुनसान सड़क पर, एक कार अचानक रुक जाती है जब हेडलाइट्स में एक बच्चा दिखाई देता है। समय थम जाता है, हवा रुक जाती है, लेकिन वह....
आधी रात की सुनसान सड़क पर, एक कार अचानक रुक जाती है जब हेडलाइट्स में एक बच्चा दिखाई देता है। समय थम जाता है, हवा रुक जाती है, लेकिन वह आठ साल का बच्चा, सुभू, हनुमान चालीसा हाथ में लिए, चलता रहता है। तभी मंदिर के द्वार पर एक रहस्यमयी आकृति प्रकट होती है, जिसकी आँखें काली और गहरी हैं, जो सुभू को देखकर मुस्कुराता है और कहता है, "आखिरकार, तुम मिल ही गए।" वह सुभू को बताता है कि उसके अंदर समय को मोड़ने की शक्ति है, और वह सिर्फ सुभू नहीं, बल्कि 'बजरंगी योद्धा' है। एक जलता हुआ शहर, भागते लोग, और विनाश के बीच खड़ी एक विशाल आकृति का भयावह दृश्य सुभू के सामने आता है। क्या यह सिर्फ एक सपना है, या सुभू को अपनी छिपी हुई शक्तियों को पहचानकर एक प्राचीन शत्रु का सामना करना होगा?