
Agniveer Ka Divya Talvaar
विंध्याचल के बीहड़ वनों में युगों से पसरा सन्नाटा आज एक भयानक अनहोनी की आहट से काँप रहा है। कालशिला पर्वत पर सदियों से धँसी वज्रार्क तलवार, जिसे कोई साधारण....
विंध्याचल के बीहड़ वनों में युगों से पसरा सन्नाटा आज एक भयानक अनहोनी की आहट से काँप रहा है। कालशिला पर्वत पर सदियों से धँसी वज्रार्क तलवार, जिसे कोई साधारण लोहार नहीं गढ़ सकता, आज सूर्यग्रहण के दिन मुक्त होने वाली है। क्रूर सामंत जयराज, अपनी सत्ता की भूख में, उस दिव्य तलवार को पाने के लिए रुद्राकोट के निर्दोष ग्रामीणों को बंधक बना लेता है। लेकिन जब तलवार को खींचने का हर प्रयास विफल होता है और जयराज के योद्धा राख में बदल जाते हैं, तब एक साधारण आखेटक, अग्निवीर, सामने आता है। उसके स्पर्श से तलवार जाग उठती है, और उसके नेत्रों में एक नए युग की प्रतिज्ञा चमकती है। क्या यह वनवासी युवक आर्यवर्त के भाग्य को फिर से लिखेगा, या जयराज का अंधकार उसे निगल जाएगा?