
Aakhiri Nazar
1998, पुरानी दिल्ली। चाँदनी चौक की भूलभुलैया जैसी गलियों में एक सोलह साल का लड़का रहता है - अर्जुन चतुर्वेदी। मोहल्ले वाले उसे पागल कहते हैं। पागल - क्योंकि वो....
1998, पुरानी दिल्ली। चाँदनी चौक की भूलभुलैया जैसी गलियों में एक सोलह साल का लड़का रहता है - अर्जुन चतुर्वेदी। मोहल्ले वाले उसे पागल कहते हैं। पागल - क्योंकि वो रात को सोने की जगह खिड़की से गली देखता है। पागल - क्योंकि उसकी एक नोटबुक है जिसमें वो लोगों के झूठ, उनकी चाल, उनके राज़ दर्ज करता है। जब तीन बंद घरों में रहस्यमय चोरियाँ होती हैं और एक सफ़ेद साया दीवारों के पार ग़ायब होने लगता है, तो पूरा मोहल्ला भूत को कोसता है - और अर्जुन जाँच शुरू करता है। पर जितना गहरा जाता है, उतना साफ़ होता है - यह सिर्फ़ चोरी का मामला नहीं है। यह एक बीस साल पुराने धोखे की कहानी है। और उस धोखे के केंद्र में - एक नाम है जो अर्जुन की अपनी ज़िंदगी से जुड़ा है।