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Shaurya Ek Kal

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Historical

शौर्य की दुनिया और राज्य का राजा । शौर्य ने चुपचाप अपने छोटे से घर से बाहर निकलने का फैसला किया। वह नहीं चाहता था कि भीम सिंह बाबा उसे रोके....

शौर्य की दुनिया और राज्य का राजा । शौर्य ने चुपचाप अपने छोटे से घर से बाहर निकलने का फैसला किया। वह नहीं चाहता था कि भीम सिंह बाबा उसे रोके या उसकी बात सुने। उसने एक छोटी सी लकड़ी उठाई, जो शिकार के लिए एक औजार के रूप में काम कर सकती थी, और जंगल की ओर चल दिया। जंगल में अंधेरा था, लेकिन शौर्य की आँखें धीरे-धीरे अंधेरे में समायोजित होने लगीं। वह नहीं जानता था कि कहाँ जाना है या क्या शिकार करना है, लेकिन उसके अंदर एक अजीब सी जिजीविषा और उत्साह था। वह चलता रहा, अपने कदमों की आवाज सुनता रहा, और जंगल की आवाजें सुनने लगा। कुछ देर चलने के बाद, शौर्य को एक छोटा सा जानवर दिखाई दिया - एक छोटा सा हिरण जैसा प्राणी, जो जंगल की झाड़ियों में चर रहा था। शौर्य ने अपनी लकड़ी उठाई और धीरे से उस जानवर की ओर बढ़ा। उसने सोचा कि अगर वह इस जानवर को पकड़ लेता है, तो वह भीम सिंह बाबा को दिखा सकता है कि वह भी शिकार कर सकता है। जैसे ही शौर्य ने हमला करने की कोशिश की, वह जानवर अचानक तेजी से भाग गया। शौर्य ने उसका पीछा किया, लेकिन वह जानवर बहुत तेज था। शौर्य गिर गया और उसकी लकड़ी हाथ से छूट गई। वह उठा और फिर से उस जानवर को ढूंढने लगा, लेकिन वह गायब हो चुका था। शौर्य निराश हो गया, लेकिन तभी उसने एक अजीब सी आवाज सुनी। एक छोटा सा पक्षी उसके पास आया और उसके सामने एक छोटा सा चमकता हुआ पत्थर गिरा दिया। शौर्य ने वह पत्थर उठाया और देखा कि उसमें एक अजीब सी ऊर्जा थी। उसे लगा कि यह पत्थर शायद कोई विशेष शक्ति रखता है। तभी जंगल में एक हल्की सी रोशनी हुई और एक अनोखा जानवर प्रकट हुआ। वह जानवर एक छोटा सा लोमड़ी जैसा था, लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं और उसके शरीर से एक अजीब सी ऊर्जा निकल रही थी। वह जानवर शौर्य के पास आया और कहा, "तुम्हारे अंदर एक विशेष शक्ति है, शौर्य। तुम इसे पहचानो और इसका उपयोग करो।" *कहानी अभी भी जारी है... शौर्य की पहली शिकार यात्रा में और भी रोमांचक मोड़ आने वाले हैं!* शौर्य की जादुई विरासत: भाग 2* शौर्य को अभी भी समझ नहीं आया था कि वह अजीब सा लोमड़ी और वह चमत्कारी पत्थर फेंकने वाला पक्षी क्या थे। लेकिन जैसे ही उसने उस पत्थर को अपने हाथ में लिया, उसे एक अजीब सी ऊर्जा का अनुभव हुआ। वह पत्थर उसके हाथ में गर्म सा लग रहा था और उससे एक हल्की सी रोशनी निकल रही थी। तभी शौर्य के मन में एक अजीब सी याद आई। उसने सोचा कि जब वह अपनी माँ के पेट में था, तब उसके बाबा शिकार करने जाते थे और वे अक्सर अद्भुत जानवरों का शिकार करते थे। उन जानवरों से वे शक्तियाँ लेते थे जो उनके समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण थीं। शौर्य को याद आया कि उसके बाबा ने एक बार बताया था कि उनके समुदाय पर एक बार दूसरे समुदाय ने हमला किया था। उस हमले में उसके बाबा और कई अन्य लोग शहीद हो गए थे। लेकिन उनके समुदाय की एक विशेष तकनीक थी जिससे वे अपने प्रियजनों की आत्माओं को एक विशेष रूप में संरक्षित कर सकते थे। वह लोमड़ी और वह पक्षी उसी तकनीक का परिणाम थे। वे शौर्य के बाबा और अन्य शहीदों की आत्माओं के हिस्से थे, जिन्होंने अपनी शक्तियों को शौर्य के लिए सुरक्षित रखा था। उन दोनों जानवरों ने शौर्य को वह जादुई पत्थर दिया था ताकि जब वह बड़ा हो, तो वह अपनी शक्तियों को पहचान सके और उनका उपयोग कर सके। शौर्य को अब समझ आया कि वह पत्थर और वे दो जानवर उसके लिए एक विशेष उद्देश्य के साथ बने थे। उसने सोचा कि जब वह बड़ा होगा, तो वह उन जानवरों से और अधिक सीखेगा और अपनी शक्तियों का उपयोग करके अपने समुदाय की रक्षा करेगा। *कहानी अभी भी जारी है... शौर्य की जादुई यात्रा में और भी रोमांचक मोड़ आने वाले हैं शौर्य की जादुई विरासत: भाग 3* लोमड़ी ने शौर्य को बताया, "तुम्हारे बाबा ने हमें अपनी शक्तियों से बनाया था, जब उन्होंने कुछ अद्भुत जानवरों का शिकार किया था। उनकी आत्मा और शक्तियाँ, और तुम्हारी माँ की भी सारी शक्तियाँ, हम दोनों में समा गई हैं - इस पक्षी में और मुझमें, लोमड़ी में।" लोमड़ी ने आगे कहा, "यह पत्थर एक अद्भुत शक्ति वाला है, जो तुम्हें भविष्य में बहुत काम आएगा। जब तुम बड़े होगे, शिकार करोगे, और अपनी यात्रा पर आगे बढ़ोगे, तब तुम्हें इसकी धीरे-धीरे पहचान होगी। तुम अपने सारे उद्देश्यों को पूरा कर पाओगे।" पक्षी ने भी अपनी आवाज में कहा, "हम अब अपनी शक्तियों का उपयोग कर चुके हैं। हम दोनों - पक्षी और लोमड़ी, अब मर जाएंगे और हवा में गायब हो जाएंगे। हम एक ही बार उपयोग कर सकते हैं अपनी शक्तियों को, और उसके बाद हमारी आत्मा भी मुक्त हो जाएगी।" लोमड़ी ने शौर्य को देखा और कहा, "तुम अपनी आगे की मंजिल पर खुद ही चलोगे। अपनी शक्तियाँ बढ़ाओ, और सबको पता चलेगा कि शौर्य एक शौर्यवान योद्धा है। अब हम जा रहे हैं इतना कहकर जाने लगे।

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