
Mujhpe Tera Haq Hai
दिल्ली का नामी बिज़नेस टायकून आरव… और मुंबई की एक साधारण, मध्यमवर्गीय लड़की मेहर… दो अलग दुनियाएँ। दो अलग सोच। दो अलग मुक़द्दर। मेहर की शांत जिंदगी उस दिन हिल जाती है, जब....
दिल्ली का नामी बिज़नेस टायकून आरव… और मुंबई की एक साधारण, मध्यमवर्गीय लड़की मेहर… दो अलग दुनियाएँ। दो अलग सोच। दो अलग मुक़द्दर। मेहर की शांत जिंदगी उस दिन हिल जाती है, जब उसकी सोसाइटी “शांतिकुंज” को तोड़कर वहाँ नई बिल्डिंग बनाने का फैसला होता है। बड़े-बड़े बिल्डर्स आते हैं, मोटी रकम का लालच देते हैं… लेकिन मेहर इनकार कर देती है। उसे नहीं पता… इस फैसले के पीछे असली खेल किसका है। वो है आरव। आरव, जो किसी भी सौदे को पाने के लिए हदें पार कर सकता है… आरव, जो मेहर की हर छोटी-बड़ी जानकारी निकलवाता है… और फिर अपनी असली पहचान छुपाकर मुंबई पहुँचता है। एक अनजान बनकर। एक दोस्त बनकर। फिर… एक प्रेमी बनकर। लेकिन ये प्यार… सच है या एक साज़िश? मेहर के दिल तक पहुँचने का ये रास्ता, क्या सिर्फ शांतिकुंज तक पहुँचने की चाल है? या इस खेल में आरव खुद अपने ही जाल में फँसता जा रहा है? उधर आरव के दुश्मन भी उसकी तलाश में हैं… और इधर मेहर का भरोसा, उसकी दुनिया, उसका परिवार—सब कुछ दांव पर है। जब मेहर को सच्चाई पता चलेगी, तो क्या बचेगा? प्यार… नफरत… या सिर्फ टूटे हुए रिश्तों की राख? क्या ये कहानी है इश्क़ की… या एक खतरनाक सौदे की? सुनिए एक ऐसी कहानी, जहाँ दिल और दिमाग की जंग में, जीत किसकी होगी—कोई नहीं जानता… "मुझपे तेरा हक़ है" — एक सस्पेंस, इमोशन और धोखे से भरी प्रेम कहानी।