
KavachDhari
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त्रेता युग का अंतिम भाग। रावण की मृत्यु के बाद लंका शांत थी, पर एक और युद्ध जन्म ले रहा था — अमृत कवच को लेकर, जिसे स्वयं सूर्यदेव ने....
त्रेता युग का अंतिम भाग। रावण की मृत्यु के बाद लंका शांत थी, पर एक और युद्ध जन्म ले रहा था — अमृत कवच को लेकर, जिसे स्वयं सूर्यदेव ने रचा था। यह वही कवच-कुंडल थे, जो एक समय कर्ण को प्राप्त हुए थे, परंतु युद्ध के बाद ब्रह्मर्षि द्वारा पुनः लौटा लिए गए और एक गुप्त रक्षक वंश को सौंपे गए। वहीं से जन्मा एक नाम — सूर्यसिंह। ना वह देव था, ना पूर्ण मानव। वह रचा गया था — रक्षण के लिए। हर युग में उसका अवतरण होता — नई पहचान, नया शरीर, पर वही आत्मा।
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