
जिस्म ख़त्म इश्क़ बाक़ी
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"जिस्म ख़त्म... इश्क़ बाक़ी है" एक हवेली, जो वीरान नहीं — मोहब्बत की राख से ज़िंदा है। 200 साल पहले, एक लड़की को डायन कहकर ज़िंदा जला दिया गया था… उसका गुनाह?....
"जिस्म ख़त्म... इश्क़ बाक़ी है" एक हवेली, जो वीरान नहीं — मोहब्बत की राख से ज़िंदा है। 200 साल पहले, एक लड़की को डायन कहकर ज़िंदा जला दिया गया था… उसका गुनाह? बेपनाह इश्क़। अब वो रूह लौट आई है — अपना अधूरा इश्क़ पूरा करने। और सज़ा देने उन्हें, जिन्होंने उसके इश्क़ को पाप कहा। अन्वी — जिसकी रगों में उसी रूह का दर्द बहता है। वीर — जिसकी रूह सब जानती है, पर जिस्म कुछ नहीं। हर रात हवेली की पांचवीं खिड़की खुलती है… हर बार एक ही आवाज़ आती है: > "मैं लौटी हूँ... अपने इश्क़ को लेने।" ये सिर्फ एक हॉरर स्टोरी नहीं, ये एक रूह की मोहब्बत है… जो मरकर भी ना मरी।