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True Love of My College

True Love of My College

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System and Superpowers

मुंबई शहर… जहाँ लाखों लोग रोज़ अपनी उम्मीदों का बोझ लेकर भागते-दौड़ते हैं। इन्हीं भीड़-भाड़ वाली सड़कों के बीच, एक जर्जर-सी बिल्डिंग की चौथी मंज़िल पर, माँ-बेटे का छोटा-सा आशियाना....

मुंबई शहर… जहाँ लाखों लोग रोज़ अपनी उम्मीदों का बोझ लेकर भागते-दौड़ते हैं। इन्हीं भीड़-भाड़ वाली सड़कों के बीच, एक जर्जर-सी बिल्डिंग की चौथी मंज़िल पर, माँ-बेटे का छोटा-सा आशियाना है। ये कहानी है उसी छोटे कमरे से शुरू होने वाली… जहाँ एक माँ के सपने और एक बेटे की टूटी हुई हिम्मत, दोनों एक साथ ज़िंदा हैं। (हल्की थकान भरी महिला की साँसें सुनाई देती हैं) उस कमरे में रहती है समीर और उसकी माँ। समीर— सोलह साल का एक दुबला-पतला लड़का। कभी स्कूल का होनहार स्टूडेंट रहा, मगर हालात ने उसे इतना तोड़ दिया कि अब किताबों में उसका मन ही नहीं लगता। सुबह का वक़्त था। किचन से बर्तनों की खड़खड़ाहट और चाय की हल्की महक कमरे में फैल रही थी। समीर की माँ हर रोज़ की तरह जल्दी उठ चुकी थी। उसकी थकी हुई आँखें और झुर्रियों भरा चेहरा, उन मुश्किलों की गवाही दे रहा था जिनसे वो रोज़ जूझती थी। कभी उसके पति के छोटे से रेस्टोरेंट में हँसी-खुशी का माहौल था, मगर बदकिस्मती ने सब छीन लिया। अब वो दूसरों के घरों में सफ़ाई का काम करती है, ताकि अपने बेटे की पढ़ाई का खर्चा उठा सके। (धीरे-धीरे एक लड़के की उनींदी आवाज़) समीर: "माँ… थोड़ा और सोने दो न।" माँ (मुस्कुराने की कोशिश करती हुई): "समीर, उठ बेटा। स्कूल का टाइम हो रहा है। देर करोगे तो फिर टीचर डाँटेंगे।" Narrator: समीर मन ही मन जानता है… माँ का हर शब्द उसके भले के लिए है। लेकिन जब पूरी क्लास में उसे नीचा दिखाया जाता है, मज़ाक उड़ाया जाता है, तब किताबें दुश्मन-सी लगने लगती हैं। और फिर गरीबी का वो बोझ… जिसकी वजह से उसकी आँखों की चमक धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

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