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Andhera Nigal Jayega

Andhera Nigal Jayega

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5
|1
Suspense & Thriller

यह कहानी “वशीकरण” एक साधारण जीवन से शुरू होकर धीरे-धीरे अलौकिक भय, मानसिक नियंत्रण और आत्मिक संक्रमण की जंग में बदल जाती है। कहानी की शुरुआत होती है अन्वी के नाम....

यह कहानी “वशीकरण” एक साधारण जीवन से शुरू होकर धीरे-धीरे अलौकिक भय, मानसिक नियंत्रण और आत्मिक संक्रमण की जंग में बदल जाती है। कहानी की शुरुआत होती है अन्वी के नाम से जुड़े रहस्यमयी तांत्रिक अनुष्ठान से, जहाँ एक शक्तिशाली सत्ता मातृका वशीकरण के माध्यम से किसी शरीर में प्रवेश करना चाहती है। घटनाओं की कड़ी में अन्वी, आरव और तांत्रिक विद्या जानने वाले कालभैरव इस अंधेरी शक्ति से टकराते हैं। शुरुआत में लगता है कि मातृका को एक शरीर चाहिए, लेकिन जल्द ही पता चलता है कि वह नामों के ज़रिए लोगों की आत्मिक ऊर्जा पर कब्ज़ा करती है। एक असफल अनुष्ठान के बाद मातृका का प्रभाव आरव, फिर अन्वी के अंदर आने-जाने लगता है। अन्वी को ब्लैकआउट होने लगते हैं, जिन दौरान वह अनजाने में लोगों को मौत के करीब पहुँचा देती है। हर शिकार से पहले उसका नाम किसी रहस्यमय तरीके से “चुना” जाता है। आरव की बहन रिद्धि भी इसका निशाना बनती है, जिससे कहानी निजी दायरे में और गहरी हो जाती है। जल्द ही खुलासा होता है कि मातृका अब एक शरीर तक सीमित नहीं — वह सपनों में प्रवेश कर रही है। पूरा शहर एक जैसा सपना देखने लगता है: एक पेड़, लाल धागे, और नाम पुकारती आवाज़। सपने लोगों की चेतना पर असर डालने लगते हैं; कुछ लोग नींद में, कुछ जागते हुए भी वशीकरण के प्रभाव में आने लगते हैं। अन्वी धीरे-धीरे सीखती है कि डर ही इस शक्ति का असली हथियार है। सपनों के भीतर जाकर वह लोगों को उनका नाम “वापस लेने” के लिए प्रेरित करती है। इससे मातृका कमजोर तो होती है, पर खत्म नहीं। अब खतरा व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक संक्रमण बन चुका है — जहाँ कोई भी अगला माध्यम बन सकता है। कहानी इस मोड़ पर पहुँचती है जहाँ हर इंसान को खुद तय करना होगा: डर के आगे झुकना है… या अपने नाम की रक्षा खुद करनी है।है

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

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