
Operation Mirror
सात महीने से लगातार लूट की घटनाएँ हो रही थीं। हर रोज़ शहर के किसी न किसी थाने में लाखों-करोड़ों की डकैती दर्ज हो रही थी। पुलिस कभी एक लुटेरे....
सात महीने से लगातार लूट की घटनाएँ हो रही थीं। हर रोज़ शहर के किसी न किसी थाने में लाखों-करोड़ों की डकैती दर्ज हो रही थी। पुलिस कभी एक लुटेरे को पकड़ती, कभी दूसरे को, लेकिन जैसे ही पूछताछ शुरू होती, सामने आने वाला शख़्स कहता – “मैंने कुछ नहीं किया… मैं तो उस रात घर पर था।” गवाह कहते – “नहीं… हमने इसी को देखा था लूट करते हुए।” सीसीटीवी, आर्टिफ़िशियल स्कैनर, यहां तक कि DNA टेस्ट तक यही साबित करते कि वही शख्स लुटेरा है। लेकिन असली सच्चाई हर बार और भी उलझन भरी हो जाती। मुंबई के पेडर रोड पर एक नामी हीरा कारोबारी सुरेश शाह का घर था। आधी रात को अचानक घर का सेफ और लॉकर खाली हो गया। करोड़ों की नकदी और हीरे-जेवर गायब। परिवार ने पुलिस को बयान दिया – “लूटने वाला… सुरेशभाई ही थे।” पुलिस हैरान – “क्या? अपने ही घर से…?” बेटा बोला – “हाँ! हम सबने अपनी आँखों से देखा, पापा लॉकर से सब निकालकर किसी हाई-टेक बैग में भर रहे थे और फिर बाहर निकल गए।” पुलिस ने सुरेश शाह को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने कहा – “मैं? मैंने तो कुछ किया ही नहीं… उस रात तो मैं अपने कमरे में सो रहा था। CCTV देख लो।” पुलिस ने DNA टेस्ट किया – रिजल्ट भी सुरेश शाह का ही आया। सबूत पक्के। लेकिन असली सवाल ये था – अगर वो अपराधी है तो उसी समय अपने कमरे में गहरी नींद में कैसे सो रहा था? घरवाले, नौकर, सब गवाही दे रहे थे कि सुरेश शाह अपने बेडरूम में मौजूद थे। कमिश्नर अरुण देशमुख ने अपने ऑफिस में हाथ पटकते हुए कहा – “ये कोई इंसानी काम नहीं है… कोई नई टेक्नॉलॉजी, कोई नया खेल चल रहा है।” साइबर सेल ने अनुमान लगाया कि कोई ह्यूमन क्लोनिंग टेक्नॉलॉजी या होलोग्राफिक AI का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन सवाल था – किसके पास इतनी हाई-टेक सुविधा थी? और क्यों? हर रोज़ अखबारों में हेडलाइन छपती – “मुंबई का नया ‘डुप्लीकेट चोर’ फिर सक्रिय, पुलिस के हाथ खाली।” “क्या इंसान खुद अपनी लूट कर रहे हैं?” एक रात, कमिश्नर देशमुख के पास एक गुप्त कॉल आया – “अगर सच जानना चाहते हो… तो मरीन ड्राइव की उस पुरानी सुरंग में आधी रात को आना… लेकिन अकेले।” कमिश्नर को पहली बार लगा कि शायद असली मास्टरमाइंड उनके सामने आ सकता है। लेकिन वहाँ जो वो देखने वाला था ,वह मानव इतिहास का सबसे बड़ा झटका होगा …। जैसे ही उन्होंने उसे उठाया, वह अपने आप एक्टिव हो गई। वो शख़्स हूबहू उन्हीं जैसा था — अरुण देशमुख की कॉपी! रहस्यमयी संदेश स्क्रीन पर ‘डुप्लीकेट देशमुख’ मुस्कुराया और बोला – “क्यों कमिश्नर, चौक गए? डरिए मत… ये कोई जादू नहीं है। ये आप ही हो… फर्क बस इतना है कि मैं आपकी परछाई हूँ। आप समाज की सेवा वर्दी पहनकर करते हो… और मैं, लूट कर।” देशमुख हैरान और गुस्से में – “ये कौन सा घटिया मज़ाक है? तुम कौन हो? किस टेक्नॉलॉजी से मेरा रूप लेकर अपराध कर रहे हो?” वो शख़्स हँसा – “टेक्नॉलॉजी? ओह कमिश्नर… तुम 2099 में भी पुराने ढर्रे पर सोच रहे हो। ये सिर्फ़ टेक्नॉलॉजी नहीं है, ये नया सोशल कॉन्ट्रैक्ट है। तुम्हें लगता है मैं चोर हूँ… लेकिन असली चोर तो ये सिस्टम है, जिसे तुम बचाने के लिए रोज़ वर्दी पहनकर निकलते हो।” तुम जैसे लोगो के लिए ये टेक्नोलॉजी होगा मेरे लिए तो भगवान है ओर इस टेक्नोलॉजी के युग का मै नया अवतार हु ,जैसा कि हर युग में होता आया है ,ठीक उसी तरह । (बहस की जंग जारी थी ) देशमुख गरजकर बोले – “चुप! कानून से ऊपर कोई नहीं। चाहे इंसान हो या मशीन।” ‘डुप्लीकेट’ बोला – “कानून? हा हा हा… कानून ने कभी अमीरों को रोका है? तुम देखते हो रोज़…टेक्नोलॉजी के बदलते युग में भी आज ये हालात,जो कि नहीं होने चाहिए थे देश के । ओर तुम दुहाई देते हो कानून की सरकार की । गरीब भूखे मरते हैं, बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं, और अरबपति स्पेस में छुट्टियाँ मना रहे हैं। मैं क्या करता हूँ? अमीरों से छीनता हूँ और असली ज़रूरतमंदों तक पहुँचाता हूँ। यानी मैं भी समाज सेवा कर रहा हूँ, बस मेरे तरीके अलग हैं।” देशमुख की आँखों में आग भर आई – ओर बोला तुम सिस्टम को धोखा दे रहे हो ‘डुप्लीकेट’ हँस पड़ा – “धोखा? धोखा तो इस सिस्टम ने दिया है इंसानियत को। ओर देता आया है इतिहास भरा पड़ा है आजादी से लेकर आज तक कैसे नेताओं ओर अपनी अपनी सरकार बनाई ओर अपनी जेबें भरी ,गरीब आज भी गरीब है अमीर ओर अमीर हो गया । तुम सोच भी नहीं सकते कि मैं कितनों के रूप में इस शहर में घूम रहा हूँ। कोई भी अमीर सुरक्षित नहीं है। और हाँ… अगर चाहूँ तो मैं खुद तुम्हारे नाम से भी अपराध कर सकता हूँ।”लेकिन नहीं तुम मेरी लिस्ट में नहीं हो ,जैसा कि मैने देखा है अपने डाटा में तुम्हारा रिकॉड अच्छा है ओर दिल के भी साफ हो ,तभी तो 20 साल के करियर में 125 जगह ट्रांसफर हो चुका है ।
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
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