
Thukrake Mera Pyar
ठुकरा के मेरा प्यार मुंबई की आर. के. गलियों में एक लडका रहता था — रुद्र अग्रवाल. गरीबी में पला- बढा रुद्र ऐसा लडका था जिसकी जेब हमेशा फटी रहती और अक्सर....
ठुकरा के मेरा प्यार मुंबई की आर. के. गलियों में एक लडका रहता था — रुद्र अग्रवाल. गरीबी में पला- बढा रुद्र ऐसा लडका था जिसकी जेब हमेशा फटी रहती और अक्सर खाने के लिए भी पैसे नहीं होते. सीधा- साधा स्वभाव, मेहनती दिल और संघर्ष से भरी जिंदगी — यही उसकी पहचान थी. रुद्र दिन में डिलीवरी बॉय का काम करता और शाम को Collage में पढाई करता. हालात बहुत खस्ता थे, लेकिन सपनों को उसने कभी मरने नहीं दिया. अगले दिन Collage में वैलेंटाइन डे मनाया जा रहा था. सुबह- सुबह रुद्र अपने हाथ में एक लाल गुलाब लिए Collage पहुँचा. उसकी धडकनें तेज थीं, चेहरे पर मासूमियत और आँखों में उम्मीद की चमक. वह Collage की सबसे खूबसूरत लडकी माहिरा राठौर को प्रपोज करने वाला था. जैसे ही रुद्र माहिरा के सामने पहुँचा, उसने काँपते हाथों से गुलाब बढाया और हिम्मत करके बोला — माहिरा. क्या तुम मेरी जिंदगी का हिस्सा बनोगी? माहिरा ने पहले तो उसे हैरानी से देखा, फिर अचानक उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया. वह पूरे Collage के सामने चिल्लाई — अबे फटीचर! कभी आइने में अपना चेहरा देखा है? तुझ जैसी औकात वाला मुझे प्रपोज करेगा? माहिरा राठौर को? इतना कहकर उसने जोर से रुद्र के गाल पर एक थप्पड जड दिया. पूरा Collage हँसी से गूँज उठा. छात्र- छात्राएँ ताली बजाते हुए रुद्र का मजाक उडाने लगे. रुद्र की आँखों में आँसू थे, दिल टूट चुका था, लेकिन तभी उसका सबसे अच्छा दोस्त टोनी दौडकर आया और उसे वहाँ से खींचकर ले गया. उस अपमान के बीच भी रुद्र के मन में सिर्फ एक आग जल रही थी — मुझे ठुकराकर. एक दिन तुम बहुत पछताओगी, माहिरा!