
Raah-E-Wafa
यह कहानी 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के दौर की है, जब हिंदुस्तान पर मुस्लिम सुल्तानों का शासन था।पारस का सुल्तान अज़ान हातिम अल रशीद, 28 साल का एक नौजवान....
यह कहानी 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के दौर की है, जब हिंदुस्तान पर मुस्लिम सुल्तानों का शासन था।पारस का सुल्तान अज़ान हातिम अल रशीद, 28 साल का एक नौजवान बादशाह । बाज़ सी तेज़ रफ़्तार और तेज़ नजर। बेरहम बेदिल खूंखार जो अपनी सल्तनत को बचाने के लिए कुछ की कर गुजरने को को तैयार, लोग इसे पारस का शेर, कुछ बेरहम सुल्तान के नाम से भी जानते है। मोहब्बत पर भरोसा नहीं करता, क्योंकि उसे हमेशा साज़िशों से घिरा रहना पड़ा है। वहीं दिल्ली सल्तनत की 17 साल की शहजादी महापारा मतलब चांद का टुकड़ा। जैसा नाम वैसे खूबसूरती और वैसी ही जहानत। क्या होगा जब होगा इनका आमना सामना? जानने के लिए सुनिए, "Raah-E-Wafa" सिर्फ "Pocket FM" पर।