
Agastyan Tha Rise
अगस्त्यन जब दुनिया बहुत आगे बढ़ जाती है, तो कभी-कभी वह पीछे छूट जाती है।ख़ासकर सोचने में। कलियुग के इस समय में मनुष्य मोबाइल, सुविधा और विकल्पों में इतना उलझ गया....
अगस्त्यन जब दुनिया बहुत आगे बढ़ जाती है, तो कभी-कभी वह पीछे छूट जाती है।ख़ासकर सोचने में। कलियुग के इस समय में मनुष्य मोबाइल, सुविधा और विकल्पों में इतना उलझ गया है कि उसने प्रश्न पूछना छोड़ दिया है। यही स्थिति मोहासुर को शक्ति देती है।वह असुर जो हथियारों से नहीं, भ्रम, सुविधा और ध्यान भटकाव से राज करता है। मोहासुर मनुष्य को स्वतंत्र होने का भ्रम देता है, जबकि वह उसे इच्छाओं का गुलाम बना देता है। वह सत्य को कठिन बना देता है और झूठ को आरामदायक। देवता यह समझ जाते हैं कि इस युद्ध को अस्त्रों से नहीं जीता जा सकता। सेनापति कार्तिकेय निर्णय लेते हैं कि वे देव रूप में नहीं, एक साधारण मनुष्य के रूप में पृथ्वी पर उतरेंगे,ताकि मनुष्य को उसकी सोई हुई चेतना याद दिला सकें। उसी समय, एक और शक्ति जागती है अगस्त्य, जो ज्ञान और विवेक का प्रतीक है। वह उपदेश नहीं देता, बस चलता है, देखता है, और प्रश्न जगाता है। पृथ्वी पर एक बालक जन्म लेता है कार्तिकेय का अंश जो रोता नहीं वह देखता है। उसके भीतर भविष्य की जागरूकता पल रही होती है। मोहासुर इसे महसूस करता है, पर उसे भरोसा है कि आधुनिक मनुष्य सुविधा नहीं छोड़ेगा। कहानी का संघर्ष युद्ध का नहीं, जागरण का है। अगस्त्य और वह बालक मनुष्य को यह सिखाने आते हैं कि देवता बाहर नहीं, अंदर होते हैं। और जब भी मनुष्य सोचना छोड़ देता है, तब कोई न कोई अगस्त्यन फिर जन्म लेता है।
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