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Sanjay- The Witness

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Sci-Fi

संजय - द विटनेस: पूरी कहानी दिल्ली के एक छोटे से साउंडप्रूफ कमरे में, 28 वर्षीय पूर्व पत्रकार संजय अपना पॉडकास्ट "द विटनेस" चलाता है। उसका मकसद उन सचाइयों को सामने....

संजय - द विटनेस: पूरी कहानी दिल्ली के एक छोटे से साउंडप्रूफ कमरे में, 28 वर्षीय पूर्व पत्रकार संजय अपना पॉडकास्ट "द विटनेस" चलाता है। उसका मकसद उन सचाइयों को सामने लाना है जिन्हें मुख्यधारा की मीडिया दबा देती है। पिछले कुछ महीनों से, संजय दुनिया भर में हो रही अजीबोगरीब प्राकृतिक आपदाओं—तुर्की का भूकंप, पाकिस्तान की बाढ़, और जोशीमठ का धंसना—पर नज़र रख रहा था। उसने इन घटनाओं में एक पैटर्न देखा: तबाही से ठीक 48 घंटे पहले, वहां जानवरों का व्यवहार अजीब हो गया था और लोगों ने ज़मीन के नीचे से एक 'हमिंग' (Humming) आवाज़ सुनी थी। संजय ने पाया कि ये घटनाएं वहीं हो रही थीं जहाँ रहस्यमयी टेक कंपनी "एथेलरेड ग्लोबल" ने अपने रिसर्च सेंटर खोले थे। अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए, उसे डार्क वेब पर डॉ. द्रोण का नाम मिला, जो एक पूर्व रक्षा वैज्ञानिक थे और सालों से गायब थे। संजय ने उन्हें हिमालय की रामगिरि पहाड़ियों में एक वीरान वेधशाला में ढूंढ निकाला। वहां, एक डरे हुए डॉ. द्रोण ने खुलासा किया कि 1980 के दशक में भारत ने "प्रोजेक्ट मेघदूत" शुरू किया था—मौसम को हथियार बनाने की तकनीक। इसका मकसद कृत्रिम भूकंप और तूफान पैदा करना था। खतरे को भांपते हुए द्रोण ने इसे बंद करवा दिया था, लेकिन एथेलरेड ग्लोबल ने उस डेटा को चुरा लिया। अब एथेलरेड "ग्रेट रीसेट" की योजना बना रहा था—दुनिया को तबाह करके अपनी नई व्यवस्था लागू करना। तभी एथेलरेड की प्राइवेट आर्मी 'एजिस' ने हमला कर दिया। द्रोण ने संजय को सबूतों वाली हार्ड ड्राइव देकर भगा दिया और खुद को वेधशाला के साथ उड़ा लिया। संजय अब एक भगोड़ा था, जिस पर आतंकी होने का झूठा आरोप था। एथेलरेड के ट्रैकिंग सिस्टम से बचते हुए, उसे हैकर ग्रुप "वृक" और उसकी लीडर अवनि ने बचाया। अवनि ने ड्राइव डिकोड की, जिससे पता चला कि एथेलरेड का अगला निशाना "भाखड़ा-नांगल बाँध" है। ऑपरेशन "जलप्रलय" के तहत, बाँध की नींव में लगाए गए "सोनिक रेज़ोनेटर" को एक्टिवेट करके उत्तर भारत और पाकिस्तान को डुबोने की साजिश रची गई थी। इस ऑपरेशन की सुरक्षा एथेलरेड के सिक्योरिटी चीफ, जनरल भीष्म के पास थी, जो एक सम्मानित पूर्व वॉर हीरो थे। संजय ने भीष्म की बेटी, अदिति (एक क्लाइमेट साइंटिस्ट) की मदद से जनरल तक पहुँचने का जोखिम उठाया। एक गुप्त मीटिंग में, संजय ने भीष्म को बताया कि "जलप्रलय" का असली मकसद नरसंहार है और बाँध टूटने पर सबसे पहले अदिति की लैब डूबेगी। यह सुनकर भीष्म टूट गए और उन्हें एहसास हुआ कि एथेलरेड ने उनकी देशभक्ति का गलत फायदा उठाया है। भीष्म ने ऑपरेशन रोकने का आदेश दिया, लेकिन एथेलरेड ने उन्हें धोखा देते हुए मारने का हुक्म दे दिया। वृक की टीम ने ऐन वक्त पर हमला करके संजय और भीष्म को बचा लिया। अब संजय, अवनि और जनरल भीष्म एक साथ थे। एथेलरेड ने प्लान लीक होने के डर से बाँध तोड़ने का समय पहले कर दिया। वे तुरंत भाखड़ा-नांगल के लिए निकले। बाँध पर एथेलरेड की फौज तैनात थी। जनरल भीष्म ने अपनी गलती सुधारने के लिए खुद को बलिदान कर दिया—वो अकेले ही दुश्मन से भिड़ गए ताकि संजय और अवनि कंट्रोल रूम तक पहुँच सकें। अवनि सिस्टम हैक नहीं कर पाई, इसलिए संजय ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी से भरे ठंडे शाफ्ट में छलांग लगा दी। पानी के अंदर, सांस रुकने की कगार पर, उसने सोनिक रेज़ोनेटर की मेन केबल काट दी। मशीन बंद हो गई और बाँध बच गया। संजय जिंदा बच गया। उसने एथेलरेड के सारे काले कारनामे और "जलप्रलय" के सबूत अपने पॉडकास्ट के जरिए पूरी दुनिया में लाइव ब्रॉडकास्ट कर दिए। एथेलरेड का असली चेहरा बेनकाब हो गया, कंपनी गिर गई और जांच शुरू हो गई। कहानी के अंत में, संजय अभी भी छिपा हुआ है क्योंकि खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नए अंडरग्राउंड स्टूडियो से उसका आखिरी संदेश गूंजता है: "यह अंत नहीं, शुरुआत है। जब तक सच पर अंधेरा रहेगा, मैं बोलता रहूँगा। मैं संजय हूँ... और मैं देख रहा हूँ।"

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

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