
समय का आख़िरी सिक्का
बनारस की तंग गलियों में, जहाँ समय की टिक-टिक एक संगीत थी, विक्रम अपनी छोटी सी घड़ी की दुकान चलाता है। उसे हमेशा समय के साथ एक अजीब सा जुड़ाव....
बनारस की तंग गलियों में, जहाँ समय की टिक-टिक एक संगीत थी, विक्रम अपनी छोटी सी घड़ी की दुकान चलाता है। उसे हमेशा समय के साथ एक अजीब सा जुड़ाव महसूस होता है – जैसे वो घड़ियों की फुसफुसाहट सुन सकता है, उनके रुकने का पल पहले ही जान सकता है। एक तूफानी रात, जब पूरा शहर थम सा गया है, एक रहस्यमयी बूढ़ा उसकी दुकान में आता है। वह एक सुनहरा सिक्का मेज पर रखता है, जिसकी सुई उल्टी दिशा में घूम रही है, और विक्रम से उसे ठीक करने को कहता है। यह कोई साधारण घड़ी नहीं, बल्कि समय को थामने वाला एक प्राचीन रहस्य है। जब विक्रम उस सिक्के को छूता है, तो उसकी दुकान की सारी घड़ियाँ एक साथ रुक जाती हैं, और बाहर पूरा बनारस समय के बंधन में जम जाता है। क्या विक्रम इस रहस्यमयी सिक्के को सुलझा पाएगा, या समय हमेशा के लिए थम जाएगा?
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
E1. समय का आख़िरी सिक्का
E2. रुका हुआ बनारस
E3. टाइम ब्रेकर का सच
E4. टाइम कीपर का रहस्य
E5. टाइम का रहस्य
E6. टूटी घड़ी की गूंज


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