
शनैश्चर कर्म का हिसाब
लोग शनिदेव का नाम सुनते ही डर क्यों जाते हैं? क्योंकि बचपन से हमें बताया गया है कि शनिदेव की नजर पड़ गई तो मुश्किलें शुरू हो जाएंगी। साढ़ेसाती आ गई....
लोग शनिदेव का नाम सुनते ही डर क्यों जाते हैं? क्योंकि बचपन से हमें बताया गया है कि शनिदेव की नजर पड़ गई तो मुश्किलें शुरू हो जाएंगी। साढ़ेसाती आ गई तो जिंदगी बदल जाएगी। शनिवार आया तो सावधान रहना चाहिए। लेकिन क्या किसी देवता को सिर्फ इसलिए समझा जा सकता है क्योंकि लोग उससे डरते हैं? या फिर उस देवता की अपनी भी एक कहानी है? एक ऐसी कहानी जिसमें वह खुद कभी किसी के फैसले का इंतजार करता था। एक ऐसा बालक, जो अपने ही परिवार में अपने अस्तित्व को समझने की कोशिश करता था। एक ऐसा पुत्र, जिसके आसपास रिश्तों का सच छिपा हुआ था। एक ऐसा भाई, जिसने परिवार के भीतर प्रेम और दूरी दोनों देखे। एक ऐसा देवता, जिसके हाथ में किसी के कर्मों का फल देने की जिम्मेदारी आई। और फिर वही देवता एक दिन ऐसी जगह खड़ा हुआ, जहां उसे तय करना पड़ा कि न्याय सिर्फ सजा देना है या किसी के दर्द को समझना भी न्याय का हिस्सा है। यह कहानी है सूर्यपुत्र शनैश्चर की।