
युगांतरा
कुछ कहानियाँ समय के साथ खत्म हो जाती हैं… और कुछ कहानियाँ समय को ही बदलना शुरू कर देती हैं। आधुनिक वाराणसी में रहने वाली मीरा अपनी जिंदगी को सामान्य समझती थी।....
कुछ कहानियाँ समय के साथ खत्म हो जाती हैं… और कुछ कहानियाँ समय को ही बदलना शुरू कर देती हैं। आधुनिक वाराणसी में रहने वाली मीरा अपनी जिंदगी को सामान्य समझती थी। लेकिन एक पुराने लॉकेट के मिलने के बाद उसके सपनों, उसकी यादों और उसकी पहचान में कुछ ऐसा बदलने लगता है, जिसे वह समझ नहीं पाती। उसे बार-बार एक ऐसे युग की झलक दिखाई देती है, जहाँ एक अधूरा वचन, एक अनजाना चेहरा और एक गहरी पुकार उसका इंतज़ार कर रहे हैं। धीरे-धीरे मीरा को एहसास होता है कि यह सिर्फ सपना नहीं है। कोई पुराना समय उसके अंदर जाग रहा है। उसके कमरे की दीवारें बदलने लगती हैं, उसकी लिखावट किसी और की लगने लगती है, और आईने में उसे कभी-कभी अपना चेहरा नहीं, किसी बीते युग की परछाई दिखाई देती है। उस युग में उसका सामना होता है एक ऐसे पुरुष से, जो उसे पहली नज़र में पहचानता है… जैसे वह सदियों से उसका इंतज़ार कर रहा हो। लेकिन यह प्रेम जितना गहरा है, उतना ही खतरनाक भी। क्योंकि हर मुलाकात वर्तमान को बदल रही है। हर याद किसी सच को मिटा रही है। और हर वचन समय की रेखाओं को तोड़ रहा है। क्या मीरा अपने अधूरे प्रेम को पूरा कर पाएगी? या समय एक बार फिर उस प्रेम को छीन लेगा, जिसे युगों ने छुपाकर रखा था?
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
E1. पुराना लॉकेट
E2. आईने की परछाई
E3. पहला नाम
E4. प्राचीन काशी की पहली झलक
E5. तुम लौट आईं
E6. बदली हुई लिखावट


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