
नागबंधन
घने जंगल में, सदियों पुराने 'कालभैरव के गुप्त मंदिर' के नीचे, पुरातत्वविद् अद्वय राघव को एक ऐसा रहस्य मिलता है जिसे इतिहास ने जानबूझकर दफन कर दिया था। सात भूमिगत....
घने जंगल में, सदियों पुराने 'कालभैरव के गुप्त मंदिर' के नीचे, पुरातत्वविद् अद्वय राघव को एक ऐसा रहस्य मिलता है जिसे इतिहास ने जानबूझकर दफन कर दिया था। सात भूमिगत कक्षों की खोज करते हुए, वह एक ऐसे सातवें द्वार तक पहुँचता है जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं, कोई नक्शा नहीं, और जिसे चौदहवीं सदी के एक दुर्लभ पांडुलिपि में 'काल-रहस्य' कहा गया है। यह द्वार किसी खजाने की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि किसी 'विस्मृत वस्तु' को दुनिया से दूर रखने के लिए बनाया गया है। जब अद्वय और उसकी सहायक उन्नी उस पांच फीट मोटे पत्थर के द्वार को खोलते हैं, तो भीतर से आती एक अजीबोगरीब खटखटाहट उन्हें चौंका देती है। यह खटखटाहट किसी धातु की नहीं, बल्कि किसी बेहद कठोर और सूखी चीज़ की है, जो सदियों से बंद इस द्वार को भीतर से खोलने की कोशिश कर रही है। क्या अद्वय ने अनजाने में किसी प्राचीन अभिशाप को जगा दिया है, या वह समय को बांधने वाले किसी ऐसे रहस्य के करीब पहुँच गया है जिसे कभी खोला नहीं जाना चाहिए था?