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त्रिदेवा का युद्ध

त्रिदेवा का युद्ध

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Suspense & Thriller

त्रिदेवा को अपने आंचल में ले लिया। समया का किया हुआ हर जादू, हर वायरस और हर छल देवी के चरणों की धूल मात्र रह गया। देवी की आवाज़ गूँजी: "समया!....

त्रिदेवा को अपने आंचल में ले लिया। समया का किया हुआ हर जादू, हर वायरस और हर छल देवी के चरणों की धूल मात्र रह गया। देवी की आवाज़ गूँजी: "समया! तूने सृजन और काल के साथ खिलवाड़ किया है। तूने उस पुरुष को शती पहुँचाई जो संसार का आधार है। अब तेरा न्याय काल पुरुष नहीं, स्वयं मैं करूँगी!" देवी के स्पर्श से त्रिदेवा के पैर का वह पुराना घाव भरने लगा। उनकी देव-आत्मा अब उस असुर-मानव शरीर की बेड़ियों को तोड़कर बाहर आने लगी। दृश्य 5: वज्रकाल का परिवर्तन वज्रकाल ने जब देवी को देखा और अपने दादा का असली स्वरूप पहचाना, तो वह उनके चरणों में गिर पड़ा। उसकी आँखों से पश्चाताप के आँसू बह रहे थे। शिवांश ने भी अपनी माँ (देवी) को प्रणाम किया। २० रक्षक अब देवी के इर्द-गिर्द कतारबद्ध खड़े थे। देवी अब समया को क्या सज़ा देंगी? क्या उसे हमेशा के लिए शून्य में फेंक दिया जाएगा? काल पुरुष जो कैद हो चुका है, उसे आज़ाद करने के लिए क्या शिवांश को कोई बड़ी परीक्षा देनी होगी? क्या अब कलयुग का अंत होगा और कालब्रह्मा फिर से अपने सिंहासन पर लौटेंगे? प्रस्तुत है भाग 8: नवग्रहों का अपहरण और काल का बंधन भाग 8: नवग्रहों का अपहरण और भाग्य का बंधक दृश्य 1: समया का अंतिम और सबसे भयानक षड्यंत्र बंकर में देवी के प्रकटीकरण और अपनी सेना के विनाश को देखकर समया समझ गई थी कि अब सीधे युद्ध से जीतना मुमकिन नहीं है। उसने महसूस किया कि देवी की शक्ति के सामने उसकी आसुरी माया टिक नहीं पाएगी। लेकिन समया 'समय' की स्वामिनी बनने का सपना देख रही थी, और उसे पता था कि ब्रह्मांड का शासन 'नवग्रहों' के प्रभाव से चलता है। उसने अपनी बची-कुची काली शक्तियों को समेटा और अंतरिक्ष के उस गुप्त द्वार पर पहुँची जहाँ नवग्रहों का निवास है। समया (पागलपन भरी आवाज़ में): "देवी, आप उन्हें बचा सकती हैं, पर आप उनकी किस्मत नहीं बदल सकतीं! अगर ग्रह मेरे बस में होंगे, तो इस सृष्टि का भाग्य मैं लिखूँगी!" दृश्य 2: नवग्रहों का अपहरण समया ने अपने मायावी खंजर से निकलने वाले काले धुएं का एक जाल बुना। उसने सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—इन नौ शक्तियों पर एक साथ हमला किया। कलयुग के आकाश में अचानक खलबली मच गई। दिन में अंधेरा छा गया और रात में तारे जलने लगे। समया ने एक प्राचीन 'तांत्रिक चक्र' बनाया और नवग्रहों को उनकी कक्षाओं (orbits) से खींचकर अपनी स्वयं की जन्म-कुंडली के 'अमर भाव' में कैद कर लिया। जैसे ही नवग्रह उसकी कुंडली के वश में हुए, पूरी सृष्टि का 'भाग्य चक्र' रुक गया। जो बीमार थे, वे कभी ठीक नहीं हो सकते थे; जो मर रहे थे, उनकी आत्मा शरीर में ही फंस गई। समय का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। दृश्य 3: अमर दशा और ब्रह्मांड का सन्नाटा समया ने नवग्रहों को ऐसी 'अमर दशा' में स्थित कर दिया जहाँ से वे कभी बाहर नहीं निकल सकते थे। अब सूर्य की रोशनी केवल समया की इच्छा से धरती पर पड़ती, और शनि का न्याय केवल उसके दुश्मनों के लिए होता। समया अट्टहास करने लगी: "अब न कोई आदि पराशक्ति काम आएगी, न कालब्रह्मा! मैंने किस्मत को ही कैद कर लिया है। अब त्रिदेवा (कालब्रह्मा) कभी अपनी पूर्ण शक्ति प्राप्त नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनकी किस्मत के सितारे अब मेरी मुट्ठी में हैं!" दृश्य 4: देवी और शिवांश की चिंता बंकर में, जहाँ देवी आदि पराशक्ति ने त्रिदेवा और वज्रकाल को सुरक्षित किया था, अचानक वहां का वातावरण बोझिल हो गया। देवी ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि आकाश मंडल से ग्रह गायब हो चुके हैं। देवी: "शिवांश! समया ने वह अपराध कर दिया है जिसकी सज़ा पूरी सृष्टि को भुगतनी होगी

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