
जिस दिन आसमान ने जवाब दिय
एक छोटे से गाँव की कच्ची गलियों में पली-बढ़ी तारा के सपने आसमान जितने ऊँचे हैं, लेकिन उसकी हकीकत एक टूटी हुई मेज और किताबों के चंद पन्नों तक सिमटी....
एक छोटे से गाँव की कच्ची गलियों में पली-बढ़ी तारा के सपने आसमान जितने ऊँचे हैं, लेकिन उसकी हकीकत एक टूटी हुई मेज और किताबों के चंद पन्नों तक सिमटी है। जब एक जिला-स्तरीय छात्रवृत्ति परीक्षा का ऐलान होता है, तो यह उसके लिए सिर्फ एक इम्तिहान नहीं, बल्कि गरीबी के दलदल से बाहर निकलने का इकलौता रास्ता बन जाता है। वह रात-दिन एक करके पढ़ाई करती है, हर मुश्किल सवाल से जूझती है, लेकिन जब परिणाम आता है, तो उसके सारे सपने बिखर जाते हैं। 41 नंबर... क्या यह सिर्फ एक हार है, या नियति का कोई गहरा संकेत? क्या तारा अपनी सारी मेहनत के बावजूद हार मान लेगी, या यह असफलता ही उसे एक ऐसे रास्ते पर ले जाएगी जहाँ उसकी असली पहचान छिपी है?