
ज़मीन का हिसाब
ज़मीन का हिसाब मरे हुए लौट आए हैं और उन्हें अच्छी तरह याद है कि उन्हें किससे मिलना है। यह कोई साधारण संक्रमण नहीं है बल्कि यह एक व्यक्तिगत और नैतिक....
ज़मीन का हिसाब मरे हुए लौट आए हैं और उन्हें अच्छी तरह याद है कि उन्हें किससे मिलना है। यह कोई साधारण संक्रमण नहीं है बल्कि यह एक व्यक्तिगत और नैतिक सर्वनाश है। पूरे देश में एक खौफनाक सन्नाटा पसरा हुआ है। Electricity की लाइनें मर चुकी हैं और Internet के तार बेजान होकर लटक रहे हैं। देश के बड़े Highways पर लोगों की छोड़ी हुई गाड़ियाँ खड़ी हैं जो अब धूल और राख की परतों के नीचे दबी हुई हैं। रेडियो पर केवल चेतावनी भरे संदेश और अजीब सी घरघराहट सुनाई देती है। कुछ लोग इसे भगवान का प्रकोप कह रहे हैं लेकिन कुछ जानते हैं कि यह असल में कर्मों का हिसाब है। यहाँ मुर्दे केवल मांस की भूख की वजह से हमला नहीं करते। उनका शरीर भले ही नष्ट हो चुका है पर उनके भीतर एक याद बची हुई है। वह याद जो उनके साथ जीवन में हुए सबसे बड़े अन्याय की है। वे केवल उस चेहरे की ओर बढ़ते हैं जिसने उनकी ज़िंदगी तबाह की थी। वे धीमे हैं लेकिन लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस ढहती हुई दुनिया में मृत ही सबसे ईमानदार हैं क्योंकि वे न कोई दलील सुनते हैं और न ही किसी कानून को मानते हैं। इस कहानी का केंद्र Vikrant है जो कभी एक छोटे शहर का प्रभावशाली Land Surveyor था। वह खुद को कागज़ का आदमी समझता था। उसने वर्षों तक सरकारी फाइलों और फर्जी नाप जोक के ज़रिए हज़ारों मासूम किसानों की उपजाऊ ज़मीनें छीनी थीं। उसने उन ज़मीनों को कागज़ों पर बंजर दिखाया और उन्हें Highway Project और बड़ी फैक्ट्रियों के नाम कर दिया। Vikrant ने कभी खुद को दोषी नहीं माना क्योंकि उसके कागज़ात हमेशा कानूनी रूप से सही होते थे। लेकिन अब उसकी बनाई हुई सुरक्षित बस्ती के लोहे के गेट के बाहर वही किसान मुर्दे बनकर खड़े हैं जिनकी सीमाएँ उसने मिटाई थीं। Vikrant ने एक बड़े Industrial Campus पर कब्ज़ा कर रखा है। उसने वहां की Water Supply को अपने नियंत्रण में लिया है और वहां सशस्त्र Security Guard तैनात किए हैं। वह लोगों को बचाने का नाटक कर रहा है लेकिन असल में वह वहां का तानाशाह बना बैठा है। वह एक Cunning Survivor है जो अब धीरे धीरे एक Haunted Tyrant में बदल रहा है। उसकी सत्ता उसके अपराधबोध और Guilt पर टिकी हुई है। वह अंदर से पूरी तरह अकेला है और अपनी थकान मिटाने के लिए नशे का सहारा लेता है। हर रात गेट पर एक नया चेहरा दस्तक देता है। कभी वह मज़दूर खड़ा होता है जिसने ज़मीन छिनने के बाद आत्महत्या की थी तो कभी उसका अपना पुराना Partner दिखाई देता है जिसे उसने सालों पहले सौदे में धोखा दिया था। हर हमला एक नया आरोप है और हर मुर्दा चेहरा Vikrant के अतीत का एक काला सच है। जैसे जैसे खाना खत्म हो रहा है और किले के भीतर बेचैनी बढ़ रही है वैसे वैसे Vikrant और भी क्रूर होता जा रहा है। वह नियम सख्त करता है और असहमति को दबाता है लेकिन हर फैसला उसकी आत्मा का एक और हिस्सा खा रहा है। सवाल सिर्फ जीवित बचने का नहीं है। सवाल यह है कि क्या विकास के नाम पर मिटाई गई ज़मीनें अपना हिसाब लेकर लौट आई हैं। क्या कानूनी जीतें मौत के बाद भी किसी को बचा सकती हैं या हर दलील का एक दिन हिसाब होता है। यह कहानी एक ऐसे इंसान के पतन और संघर्ष की है जो दुनिया को बचाने की कोशिश कर रहा है जबकि वह खुद उस डरावनी सज़ा का सबसे बड़ा हकदार है। ज़मीन का हिसाब अब शुरू हो चुका है और इस बार कोई भी फाइल या System विक्रांत को उस सच से नहीं बचा पाएगा जो उसके गेट की ज़ंजीरों को खड़खड़ा रहा है।
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.


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