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चन्द्रलेखा

चन्द्रलेखा

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5
|1
Suspense & Thriller

चन्द्रलेखा – श्रापित हवेली का रहस्य राजस्थान के रेगिस्तान के बीच बसा था एक छोटा सा गांव — रतनगढ़। दिन में यह गांव बिल्कुल साधारण लगता था, लेकिन जैसे ही रात होती,....

चन्द्रलेखा – श्रापित हवेली का रहस्य राजस्थान के रेगिस्तान के बीच बसा था एक छोटा सा गांव — रतनगढ़। दिन में यह गांव बिल्कुल साधारण लगता था, लेकिन जैसे ही रात होती, पूरे गांव पर एक अजीब सा डर छा जाता। गांव के बाहर, घने जंगल के बीच खड़ी थी एक पुरानी हवेली। लोग उसे कहते थे — “श्रापित हवेली।” गांव वालों का मानना था कि उस हवेली में एक भटकती आत्मा रहती है। एक ऐसी आत्मा जो हर अमावस्या की रात किसी न किसी को अपने साथ ले जाती थी। उस आत्मा का नाम था — चन्द्रलेखा। लेकिन सच क्या था… यह कोई नहीं जानता था। रहस्यमयी आगमन एक ठंडी रात थी। समय था रात के 1 बजे। रतनगढ़ का छोटा सा रेलवे स्टेशन लगभग वीरान पड़ा था। एक ट्रेन धीरे-धीरे रुकती है। उस ट्रेन से उतरता है एक युवक — आरव। आरव शहर से आया था। वह एक लेखक था, जो पुराने गांवों की कहानियों पर रिसर्च करता था। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि यह गांव उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा। स्टेशन पर उसके अलावा कोई नहीं था। ठंडी हवा चल रही थी। स्टेशन की पीली लाइट झिलमिला रही थी। तभी दूर अंधेरे में उसे एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। उसके हाथ में एक पुराना लालटेन और एक लाठी थी। वह आदमी धीरे-धीरे आरव की तरफ आया। उसकी आवाज़ कांप रही थी। “बेटा… इस गांव में पहली बार आए हो क्या?” आरव ने कहा, “हाँ… मैं रतनगढ़ आया हूँ।” बूढ़ा आदमी कुछ पल चुप रहा। फिर बोला, “तो एक बात याद रखना… अमावस्या की रात को हवेली के पास मत जाना।” आरव मुस्कुराया। उसे लगा यह सिर्फ गांव वालों की अंधविश्वास भरी बातें हैं। वह बिना ध्यान दिए आगे बढ़ गया। लेकिन बूढ़े आदमी की आखिरी बात उसके पीछे गूंजती रही — “क्योंकि उस रात… चन्द्रलेखा जागती है…” अगले दिन आरव गांव पहुंचा। वह वहां रहने के लिए सरपंच मोहनलाल के घर रुका। गांव वाले उससे थोड़ा डरे हुए थे। क्योंकि जो भी उस हवेली के बारे में ज्यादा पूछता था… वह कभी ज्यादा दिन नहीं टिकता था। लेकिन आरव जिद्दी था। उसने गांव वालों से पूछना शुरू किया — “चन्द्रलेखा कौन थी?” कोई साफ जवाब नहीं देता। सब बस इतना कहते — “वह एक श्रापित आत्मा है।” रात को जब आरव अपने कमरे में था… तभी अचानक उसे पायल की आवाज़ सुनाई दी। छन… छन… छन… उसने खिड़की से बाहर देखा। अंधेरे में एक लड़की खड़ी थी। सफेद कपड़ों में। लंबे बाल। और उसकी आँखों में गहरा दर्द। आरव घबरा गया। लेकिन वह लड़की बस उसे देख रही थी। जैसे वह कुछ कहना चाहती हो। अगले ही पल वह गायब हो गई। अगले कुछ दिनों में आरव को बार-बार वही लड़की दिखाई देने लगी। लेकिन अजीब बात यह थी कि वह लड़की कभी उसे नुकसान नहीं पहुँचाती थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच एक अजीब सा रिश्ता बनने लगा। एक रात उस लड़की ने पहली बार उससे बात की। उसने कहा — “डरते नहीं मुझसे?” आरव ने कहा — “नहीं… क्योंकि तुम्हारी आँखों में डर है… नफरत नहीं।” लड़की की आँखों में आँसू आ गए। और तब उसने अपना नाम बताया — “मैं चन्द्रलेखा हूँ।” आरव हैरान रह गया। वह वही आत्मा थी जिससे पूरा गांव डरता था। धीरे-धीरे चन्द्रलेखा ने अपनी कहानी बताई। बीस साल पहले… वह इसी गांव में रहती थी। वह बहुत खूबसूरत थी। गांव के एक अमीर आदमी विक्रम सिंह उससे प्यार का नाटक करता था। चन्द्रलेखा ने उस पर भरोसा किया। लेकिन विक्रम लालची था। वह हवेली के नीचे छिपी एक काली शक्ति को पाना चाहता था। उसने चन्द्रलेखा को धोखा दिया। उसे हवेली में बंद कर दिया। और उसे बहुत दर्द देकर मार डाला। मरते समय चन्द्रलेखा ने कसम खाई — जो भी प्यार में धोखा देगा… वह जिंदा नहीं बचेगा। और उसी पल उसकी आत्मा इस हवेली से बंध गई। और उसे जगाने वाला कोई और नहीं बल्कि — विक्रम सिंह था। जो अभी भी जिंदा था। एक रात अचानक विक्रम सिंह गांव लौट आया। अब वह पहले जैसा इंसान नहीं था। वह एक तांत्रिक शक्ति हासिल कर चुका था। उसने हवेली के नीचे छिपे अंधेरे को जगाने की योजना बनाई। क्योंकि अगर वह शक्ति जाग जाती… तो वह पूरी दुनिया पर राज कर सकता था। लेकिन उस शक्ति को जगाने के लिए उसे एक पवित्र आत्मा की जरूरत थी। और वह आत्मा थी — चन्द्रलेखा। प्यार दो दुनियाओं के बीच इस बीच आरव और चन्द्रलेखा के बीच का रिश्ता गहरा हो चुका था। एक इंसान और एक आत्मा का प्यार। चन्द्रलेखा डरती थी। क्योंकि वह जानती थी कि उसका साथ आरव के लिए खतरा है। लेकिन आरव ने कहा — “अगर प्यार सच्चा हो… तो दुनिया मायने नहीं रखती।” पहली बार चन्द्रलेखा को लगा कि कोई उसे समझता है। अमावस्या की रात आ गई। विक्रम ने हवेली में एक तांत्रिक अनुष्ठान शुरू किया। हवेली के नीचे छिपा अंधेरे का रक्षक जाग गया। पूरी हवेली कांपने लगी। विक्रम ने आरव की आत्मा को पकड़ लिया। वह चन्द्रलेखा। ऐसा कवर पेज बनाइए जोह बहुत द्रव नि हो ओर दर्शक को आकर्षित करे। चंद्रलेखा की दरब नि सभी हो गुर्राती हुए

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