
ग्राउंड ज़ीरो का ऑफिसर
एक रात, जब विजय अपनी किताबों में भविष्य तलाश रहा था, गाँव में ठाकुर भैरव का आतंक उसके पिता को घुटनों पर ले आता है। सबके सामने अपमानित होते पिता....
एक रात, जब विजय अपनी किताबों में भविष्य तलाश रहा था, गाँव में ठाकुर भैरव का आतंक उसके पिता को घुटनों पर ले आता है। सबके सामने अपमानित होते पिता को देख, विजय के अंदर कुछ टूट जाता है। जिस पढ़ाई से वो गरीबी की बेड़ियाँ तोड़ने का सपना देखता था, आज वही बेड़ियाँ उसे जकड़ रही हैं। ठाकुर भैरव का ऐलान है कि पंद्रह दिन में कर्ज नहीं चुकाया तो दो बीघा ज़मीन उसकी होगी, और विजय के पिता उसके दरवाज़े पर बँधे कुत्ते की तरह रहेंगे। इस अपमान और लाचारी के बीच, विजय के कंधों पर अचानक पूरे परिवार का बोझ आ जाता है। क्या वह सिर्फ़ किताबों से नहीं, बल्कि अपने दिमाग़ से इस ज़ालिम ठाकुर का सामना कर पाएगा, या यह गाँव हमेशा डर के साये में रहेगा?