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कालचक्र देवकी का मौन

कालचक्र देवकी का मौन

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Mythology

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दुनिया ने कृष्ण की विजयगाथा गाई, उसी दुनिया ने उस माँ के आँसुओं का हिसाब क्यों नहीं रखा, जिसने कृष्ण को पाने के....

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दुनिया ने कृष्ण की विजयगाथा गाई, उसी दुनिया ने उस माँ के आँसुओं का हिसाब क्यों नहीं रखा, जिसने कृष्ण को पाने के लिए अपने सात बेटों की बलि चढ़ा दी? यह कहानी उस मथुरा की नहीं है जिसे आप जानते हैं। यह कहानी है उस अँधेरी कालकोठरी की, जहाँ पत्थरों से भी ठंडी खामोशी पसरी थी। जहाँ हर आहट पर मौत का साया नाचता था और जहाँ हर नौ महीने बाद एक माँ की कोख उजाड़ दी जाती थी। राजकुमारी देवकी, जिसका विवाह मथुरा के सबसे भव्य उत्सव के साथ हुआ था, उसे क्या पता था कि उसका अपना ही भाई, कंस, उसके सुहाग की विदाई नहीं, बल्कि उसकी कोख की तबाही की पटकथा लिख चुका है। एक आकाशवाणी और पल भर में भाई यमराज बन गया! "कालचक्र: देवकी का मौन" आपको ले जाएगा उस कारागार के भीतर, जहाँ देवकी ने केवल बेड़ियाँ नहीं पहनीं, बल्कि उस 'परब्रह्म' की प्रतीक्षा की जिसने उसे अपनी माँ के रूप में तो चुना, पर उसके सात मासूम बच्चों को कंस के क्रूर हाथों से नहीं बचाया। क्या देवकी का मौन उसकी कमजोरी थी या उसका सबसे घातक हथियार? कैसे एक माँ ने अपने छह बेटों का वध अपनी आँखों के सामने देखा और फिर भी उसका ईश्वर पर से विश्वास नहीं उठा? क्या था उस सातवें गर्भ का रहस्य जो रातों-रात गायब हो गया? और जब आठवां गर्भ आया, तो क्यों कंस के अजेय साम्राज्य की दीवारें थरथराने लगीं? यह कहानी केवल पौराणिक युद्ध की नहीं है, यह एक स्त्री के उस आत्मिक संग्राम की है जहाँ वह एक तरफ अपने भाई की क्रूरता सह रही थी और दूसरी तरफ उस परब्रह्म से सवाल कर रही थी—"हे नारायण! अगर तुम रक्षक हो, तो मेरे बच्चे क्यों मर रहे हैं?" इतिहास ने देवकी को केवल 'कृष्ण की माता' कहकर किनारे कर दिया, लेकिन "कालचक्र" सुनाएगा उस 'मौन साक्षी' की जुबानी वह सच, जो आज तक पन्नों में दर्ज नहीं हुआ। सुनिए, त्याग, बलिदान और परब्रह्म के न्याय की वह महागाथा, जिसने कलयुग के दंभ को चुनौती दी।

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

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