
कछार किनारे गांव हो
ये कहानी आपदा में अवसरऔर जन जाग्रति पर आधारित है।यह कहानी है उस आम आदमी की, जो भीड़ में खड़ा है—डरा हुआ, भ्रमित, लेकिन सच जानने को बेचैन। राहत....
ये कहानी आपदा में अवसरऔर जन जाग्रति पर आधारित है।यह कहानी है उस आम आदमी की, जो भीड़ में खड़ा है—डरा हुआ, भ्रमित, लेकिन सच जानने को बेचैन। राहत शिविर में अपने लापता भाई की तलाश करता रामदीन, और मोहल्ले के अखाड़े से जागरूकता की मशाल जलाता भैरव—ये दोनों मिलकर जनता की शक्ति का प्रतीक बनते हैं। सीरीज़ में सत्ता, साज़िश और समाज—तीनों आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं। जहाँ एक ओर राजनीतिक टकराव है, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था की खामियाँ उजागर होती हैं। जहाँ अपराधी आपदा को अवसर बनाते हैं, वहीं जागरूक नागरिक डर को चुनौती देते हैं। हर एपिसोड एक नई परत खोलता है— • क्या सच में सिस्टम के भीतर कोई शामिल है? • क्या राजनीति न्याय को प्रभावित करेगी? • क्या आम लोग मिलकर संगठित अपराध को चुनौती दे पाएँगे? सामाजिक-राजनीतिक थ्रिलर है, जो दिखाती है कि जब जनता जागती है तो सत्ता को झुकना पड़ता है। यह केवल अपराध की कहानी नहीं— यह भरोसे, जवाबदेही और नागरिक साहस की कहानी है।
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
E1. मौत की धारा
E2. रेस्क्यू ऑपरेशन
E3. रेस्क्यू जारी
E4. विधायक जी का आना
E5. आपदा एवं अवसर
E6. लाशों का ढेर


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