
एक दिल दो रिश्ते
रात के सन्नाटे में, आकाश की नींद हराम है, जब उसके कानों में अपने पिता और सौतेली माँ की बेपरवाह हँसी ज़हर घोल रही है। पाँच साल पहले, एक अदालत....
रात के सन्नाटे में, आकाश की नींद हराम है, जब उसके कानों में अपने पिता और सौतेली माँ की बेपरवाह हँसी ज़हर घोल रही है। पाँच साल पहले, एक अदालत के फैसले ने उसके हँसते-खेलते परिवार को दो टुकड़ों में बाँट दिया था, और अब वह अपने ही घर में एक फ़ालतू सदस्य बनकर रह गया है। लेकिन जब आधी रात को उसकी छोटी बहन वृष्टि का डरा हुआ फोन आता है, तो आकाश के अंदर सालों से दबा गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार है। अपनी सगी माँ की बेरहमी और सौतेले पिता की अनदेखी के बीच फँसी वृष्टि की चीखें आकाश के दिल को चीर देती हैं। वह जानता है कि उसे कुछ करना होगा, लेकिन इस बेबस कैद से निकलकर अपनी बहन को इस नरक से कैसे बचाएगा, जब उसके पास न पैसा है, न पहचान, और न ही कोई सहारा?