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एक जादुई कमरा

एक जादुई कमरा

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Fantasy

“वह कमरा जो बंद नहीं होना चाहिए था” बरसात की वह रात शहर पर ऐसे टूट पड़ी थी जैसे आसमान कोई पुराना हिसाब चुकाने आया हो। घड़ी में रात के 2:17 बज....

“वह कमरा जो बंद नहीं होना चाहिए था” बरसात की वह रात शहर पर ऐसे टूट पड़ी थी जैसे आसमान कोई पुराना हिसाब चुकाने आया हो। घड़ी में रात के 2:17 बज रहे थे। अर्जुन वर्मा ने अपनी बाइक अस्पताल के पीछे वाली सुनसान सड़क पर रोकी। मोबाइल की टॉर्च जलाते ही पानी की बूँदें रोशनी में चमक उठीं। हवा में अजीब-सी गंध थी—गीली मिट्टी और किसी अनकही बेचैनी की। “यहीं बताया गया था…” उसने खुद से बुदबुदाया। अस्पताल की पुरानी इमारत—जिसे पाँच साल पहले बंद कर दिया गया था—अब उसके सामने थी। सरकारी रिकॉर्ड में इसे “संरचनात्मक रूप से असुरक्षित” बताया गया था, लेकिन अर्जुन जानता था कि सच कुछ और है। दरवाज़ा खुला हुआ था। यह बात सामान्य नहीं थी। अर्जुन एक खोजी पत्रकार था। उसने कई अपराध देखे थे, कई झूठे चेहरे बेनकाब किए थे। लेकिन इस केस ने उसे बेचैन कर दिया था— क्योंकि इस बार बात किसी रिपोर्ट की नहीं, एक गुमशुदा लड़की की थी। नाम: अनन्या मिश्रा उम्र: 19 साल अंतिम बार यहीं देखी गई थी। जैसे ही अर्जुन अंदर दाख़िल हुआ, दरवाज़ा अपने आप धड़ाम से बंद हो गया। उसका दिल एक पल को रुक-सा गया। “हैलो?” उसकी आवाज़ गलियारों में गूँजकर वापस लौट आई—खोखली, डरी हुई। अस्पताल के अंदर अँधेरा था। दीवारों पर पुराने पोस्टर लटक रहे थे— “खामोशी भी एक बीमारी है।” अर्जुन को अजीब लगा। यह पोस्टर उसने पहले कभी नहीं देखा था। फर्श पर पानी के बीच कदमों के निशान थे— नए। मतलब कोई अभी-अभी यहाँ से गया था। उसने कैमरा ऑन किया। रेकॉर्डिंग चालू थी। गलियारे के अंत में एक कमरा था— कमरा नंबर 13। सरकारी दस्तावेज़ों में इस कमरे का कोई ज़िक्र नहीं था। दरवाज़े पर लिखा था: “अंदर जाना मना है।” अर्जुन मुस्कुराया— “यही तो मेरी मंज़िल है।” जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, अंदर का दृश्य उसकी रूह तक को ठंडा कर गया। दीवारों पर तस्वीरें थीं— लड़कों और लड़कियों की। कुछ तस्वीरों पर लाल निशान। कुछ पर तारीख़ें। और बीच में— अनन्या मिश्रा की तस्वीर। नीचे लिखा था: “प्रयोग संख्या 27 – अधूरा” अर्जुन का हाथ काँप गया। पीछे से अचानक एक आवाज़ आई— “तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।” अर्जुन पलटा— और उसी पल बत्तियाँ बुझ गईं। अंधेरा। सन्नाटा। और फिर… किसी के चलने की आवाज़।

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

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