
इंजीनियर इन इंद्रलोक
मिलिए चिन्मय 'चिंटू' त्रिवेदी से—कानपुर का एक पक्के 'देसी जुगाड़' वाला मैकेनिकल इंजीनियर। बेरोजगारी के ताने, अपनी क्रश पिंकी की सगाई का दर्द और एक फ्री 5G नेटवर्क की तलाश....
मिलिए चिन्मय 'चिंटू' त्रिवेदी से—कानपुर का एक पक्के 'देसी जुगाड़' वाला मैकेनिकल इंजीनियर। बेरोजगारी के ताने, अपनी क्रश पिंकी की सगाई का दर्द और एक फ्री 5G नेटवर्क की तलाश उसे एक पुरानी हवेली तक ले जाती है। लेकिन एक पुराने तांबे के एंटीना को छूते ही एक भयानक धमाका होता है, और अगले ही पल चिंटू अपनी साधारण दुनिया से सीधा पौराणिक दुनिया (इंद्रलोक) में पहुँच जाता है! बिना मरे, जीवित शरीर के साथ स्वर्ग पहुँचे चिंटू को चित्रगुप्त का विभाग एक "सिस्टम वायरस" या अस्तित्वहीन व्यक्ति मानता है। उसे हमेशा के लिए मिटाने (डिलीट करने) की पूरी तैयारी हो चुकी है, क्योंकि यहाँ विरोधी कोई दुष्ट राक्षस नहीं, बल्कि वह पूरी ब्रह्मांडीय व्यवस्था है जो अपना संतुलन बनाए रख रही है। मौत से बचने का सिर्फ एक ही जुगाड़ है— चिंटू को उस 'हैकर' को ढूँढना है जिसने देवताओं के सिस्टम में सेंध लगाकर मृत्युलोक का पोर्टल खोला था। इस अनजान दुनिया में, चिंटू का आधुनिक ज्ञान ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे खतरनाक कमजोरी है। लेकिन मुसीबतें यहीं खत्म नहीं होतीं; हैकर को ट्रैक करने वाले चिंटू के स्मार्टफोन की बैटरी सिर्फ 5% बची है और स्वर्ग में कहीं कोई 'टाइप-सी' (Type-C) चार्जर नहीं है! और सबसे बड़ा दुश्मन कोई और नहीं, बल्कि 'समय' है। पौराणिक दुनिया का हर दिन वास्तविक दुनिया में कई सप्ताह या महीनों के बराबर है। धरती पर उसकी क्रश पिंकी की शादी हो रही है और उसकी मम्मी मान चुकी होंगी कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। क्या चिंटू अपने इंजीनियरिंग वाले दिमाग से देवताओं के इस हाई-टेक 'मायालोक' में सर्वाइव (Survive) कर पाएगा? क्या वह 5% बैटरी में हैकर को पकड़कर घर वापस जाने का रास्ता खोज पाएगा? या फिर 1000 साल के लिए एक पत्थर बनकर रह जाएगा? सुनिए हँसी, खतरे, और ब्रह्मांडीय जुगाड़ से भरी ये ब्लॉकबस्टर ऑडियो सीरीज— "इंजीनियर इन इंद्रलोक", सिर्फ पॉकेट एफएम पर!
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