
Sadak Sa Singhasan Tak
शहर की चकाचौंध से दूर, फुटपाथ पर बैठा रुद्र राजवंश, अपनी मुट्ठी में सिर्फ पैंतालीस रुपये और गले में एक रहस्यमयी अंगूठी थामे है। उसे नहीं पता कि वो कौन....
शहर की चकाचौंध से दूर, फुटपाथ पर बैठा रुद्र राजवंश, अपनी मुट्ठी में सिर्फ पैंतालीस रुपये और गले में एक रहस्यमयी अंगूठी थामे है। उसे नहीं पता कि वो कौन है, उसका अतीत क्या है, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो गरीबी की बेड़ियों को तोड़ने का सपना देखती है। एक रात, एक बूढ़े आदमी को खाना खिलाने के बाद और एक खोए हुए बच्चे को उसकी माँ से मिलाने के बाद, रुद्र को एक सपना आता है। एक आलीशान घर... एक गुस्साया हुआ आदमी... और एक बच्चे के रोने की आवाज़। क्या ये सिर्फ एक सपना है, या उसके भूले हुए अतीत का कोई सुराग? क्या ये अंगूठी ही उसे उसकी असली पहचान तक ले जाएगी, या उसे एक ऐसे रास्ते पर धकेल देगी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं? जिस लड़के के पास आज सिर्फ पैंतालीस रुपये हैं, क्या वही आने वाले समय में एक विशाल साम्राज्य का असली वारिस बनने वाला है?