
हुकुम साहब की मोहब्बत
दिल्ली की भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर स्नेहा की ज़िंदगी बिल्कुल आम तरीके से चल रही थी। मिडिल क्लास परिवार की यह सीधी-सादी लड़की छोटी-छोटी खुशियों में मुस्कुराना जानती थी और अपनी....
दिल्ली की भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर स्नेहा की ज़िंदगी बिल्कुल आम तरीके से चल रही थी। मिडिल क्लास परिवार की यह सीधी-सादी लड़की छोटी-छोटी खुशियों में मुस्कुराना जानती थी और अपनी दुनिया में ही खुश रहती थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। एक दिन अचानक उसकी राह टकराती है अभय से—राजस्थान के एक रौबदार राजपूत खानदान का वारिस। लगभग पाँच फुट छह इंच लंबा, शांत चेहरा, गहरी और तीखी नज़रें, और ऐसा स्वाभाविक रुतबा कि बिना कुछ कहे ही उसकी मौजूदगी महसूस होने लगती थी। स्नेहा अभी इस अजनबी से हुई मुलाकात को समझ भी नहीं पाती कि तभी एक बाइक उसकी राह रोक लेती है। बाइक पर बैठा वही लड़का उसके सामने आकर खड़ा हो जाता है। वह पल छोटा जरूर था, लेकिन वहीं से शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जिसका रास्ता आसान नहीं होने वाला था। दो अलग दुनिया… दो अलग सोच… और कंधों पर भारी जिम्मेदारियाँ… जब दिल आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन हालात बार-बार रास्ता रोक लेते हैं… “Hukum Saab Ki Mohabbat” एक ऐसी मोहब्बत, जिसमें इश्क भी है… रौब भी है… और किस्मत से लड़ने का हौसला भी।