
Return of the Saryu
पुलिस स्टेशन की एक सेल में बंद सरयू अपने परिवार को गुस्से से घूरते हुए देखती है, जब एक ठंडी आवाज़ गूँजती है: "अपना जुर्म कबूल कर लो सरयू, वरना..."।....
पुलिस स्टेशन की एक सेल में बंद सरयू अपने परिवार को गुस्से से घूरते हुए देखती है, जब एक ठंडी आवाज़ गूँजती है: "अपना जुर्म कबूल कर लो सरयू, वरना..."। उसके होठों पर एक टेढ़ी मुस्कान आ जाती है, क्योंकि सामने खड़ा है वो शख्स जो कभी उसके दिल में बसता था, उसका प्यार, अहार्य। लेकिन उसकी आँखों में अब सिर्फ़ नफ़रत है। सरयू पर अहाना के अपहरण और टॉर्चर का इल्ज़ाम है, जिसकी वजह से अहाना ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही है। परिवार का हर सदस्य उसे गुनहगार मानता है, सिवाय उसके दो भाइयों के, जो उस पर आँखें बंद करके भरोसा करते हैं। सरयू की आँखों में आँसू भर आते हैं, वह थक चुकी है, हार मान चुकी है। लेकिन क्या यह उसकी हार है, या किसी गहरी साज़िश का हिस्सा? क्या सरयू सच में इतनी क्रूर है, या कोई उसे फँसा रहा है? इस परिवारिक ड्रामे में, जहाँ हर रिश्ता शक के घेरे में है, क्या सरयू अपनी बेगुनाही साबित कर पाएगी, या उसे अपने ही अपनों के हाथों सज़ा मिलेगी?