
रक्त बंधनी यक्षिणी
यह कहानी है एक यक्षिणी की, जिसे यश लोक से श्रापवश पृथ्वी लोक पर दंड स्वरूप भेजा गया। उसे वर्षों तक इंसानों के बीच रहकर अपने अपराध का प्रायश्चित करना....
यह कहानी है एक यक्षिणी की, जिसे यश लोक से श्रापवश पृथ्वी लोक पर दंड स्वरूप भेजा गया। उसे वर्षों तक इंसानों के बीच रहकर अपने अपराध का प्रायश्चित करना था। धरती पर वह एक प्राचीन मंदिर में सेविका बनकर रहती है, साधारण इंसानों की भीड़ में अपनी असली पहचान छिपाते हुए। लेकिन अमावस्या की रात सब कुछ बदल जाता है… अंधकार के बीच एक तांत्रिक उसकी खोज में आ पहुँचता है। उसकी काली साधना को पूरा करने के लिए यक्षिणी की बलि ही देना चाहता है । भय और विवशता में जब वह तांत्रिक से बच निकलने की कोशिश करती है, तभी किस्मत उसे एक ऐसे इंसान से मिलवाती है—जिसके हृदय में करुणा, दया और सच्ची इंसानियत बसी थी। वह इंसान यक्षिणी का सहारा बनता है, और धीरे-धीरे यक्षिणी का हृदय भी उसकी ओर खिंचता चला जाता है। वह अपने अस्तित्व, अपनी आत्मा, और शायद अपनी संतान तक का भविष्य उसी को सौंपने का निर्णय कर लेती है। लेकिन _क्या तांत्रिक उसे ढूँढ़ निकालकर उसकी बलि चढ़ा देगा? क्या यक्षिणी सचमुच एक बच्चे को जन्म देकर अपने पति अभिनव को उसे संभालने के लिए देगी या यह श्लोक जाने पर उसे एक दंड और मिलेगा एक आम इंसान से शादी करने का जो डर यक्षिणी के मन में है तो आगे क्या होगा जानने के लिए सुनते रहिए रक्त बंधनी यक्षिणी...