
The Outlaw Commando
दिल्ली की उमस भरी रात में, तीन फौजी दोस्त एक पुरानी गली में दाखिल होते हैं, लेकिन एक अनकही आग कबीर की आँखों में सुलग रही है। जहाँ उसके साथी....
दिल्ली की उमस भरी रात में, तीन फौजी दोस्त एक पुरानी गली में दाखिल होते हैं, लेकिन एक अनकही आग कबीर की आँखों में सुलग रही है। जहाँ उसके साथी तरक्की और सम्मान पा रहे हैं, वहीं कबीर, एक घातक कमांडो, को कोर्ट-मार्शल कर फौज से निकाल दिया गया है। अब उसके पास सिर्फ गोलियों के ज़ख्म और मामूली मज़दूरी है। जब एक बूढ़े लाचार पर सुल्ताना लंगड़ा जैसा खूंखार गुंडा हमला करता है, तो कबीर के अंदर का फौजी जाग उठता है। वह जानता है कि सुल्ताना सिर्फ एक गुंडा नहीं, बल्कि एक ऐसा कीड़ा है जो कमज़ोरों का खून चूसता है। क्या कबीर अपने अतीत के घावों को भुलाकर इस शैतान से भिड़ेगा, या उसका फौजी दिमाग उसे एक ऐसे जाल में फंसा देगा जहाँ से निकलना नामुमकिन होगा?