
Rishton Ki Asliyat
रति मल्होत्रा— कॉरपोरेट दुनिया का एक ऐसा नाम, जो कामयाबी की मिसाल है… लेकिन उसके पीछे छुपी कहानी— किसी को नहीं पता। एक सख्त, खामोश और बेहद अनुशासित Executive....
रति मल्होत्रा— कॉरपोरेट दुनिया का एक ऐसा नाम, जो कामयाबी की मिसाल है… लेकिन उसके पीछे छुपी कहानी— किसी को नहीं पता। एक सख्त, खामोश और बेहद अनुशासित Executive Director— जो अपनी जिंदगी को सिर्फ एक ही मकसद तक सीमित कर चुकी है— **काम।** ऑफिस में लोग उसे “वर्कहोलिक” कहते हैं… कुछ उससे डरते हैं… कुछ उसकी पीठ पीछे बातें करते हैं… लेकिन हर महीने— वह चुपचाप अपने घर पैसे भेजती है। जैसे उसकी जिंदगी सिर्फ जिम्मेदारियों का दूसरा नाम हो। रति की दुनिया में न दोस्ती के लिए जगह है… न रिश्तों के लिए… और न ही भावनाओं के लिए। पर कहानी तब मोड़ लेती है— जब उसकी जिंदगी में आता है— **शिवाय।** एक ऐसा इंसान— जो उसके बिल्कुल उलट है। हल्का-फुल्का, ज़िंदगी को महसूस करने वाला, और हर सख्ती के पीछे छुपे सच को समझने की कोशिश करने वाला। जहाँ रति perfection में विश्वास करती है— वहीं शिवाय imperfections को अपनाने में। शुरुआत होती है टकराव से— गलतफहमियों से— और अनकही दूरी से। लेकिन धीरे-धीरे— शिवाय रति की खामोशियों के पीछे छुपी कहानी को महसूस करने लगता है। एक ऐसा अतीत— जो दर्द, जिम्मेदारियों और अधूरी बचपन की यादों से भरा है। जहाँ एक छोटी-सी बच्ची— जो कभी हँसती थी, खेलती थी… आज एक ऐसी औरत बन चुकी है— जो खुद को महसूस करने की इजाज़त तक नहीं देती। क्या शिवाय— रति की उस खोई हुई मुस्कान को वापस ला पाएगा? क्या रति— अपने बनाए हुए दीवारों को तोड़ पाएगी? और सबसे बड़ा सवाल— क्या हर सख्त इंसान के अंदर एक टूटा हुआ दिल छुपा होता है?