
#7 in Mythology
The Divine Body
देवताओं और राक्षसों के युद्ध के हजारों साल बाद अंधेरे कोने से एक अजीब सा जानवर बाहर आया। वो जानवर बहुत बड़ा था। उसके पीछे एक सुनहरे रंग का घुमता....
देवताओं और राक्षसों के युद्ध के हजारों साल बाद अंधेरे कोने से एक अजीब सा जानवर बाहर आया। वो जानवर बहुत बड़ा था। उसके पीछे एक सुनहरे रंग का घुमता हुआं चक्र था। उस चक्र पर अनगिनत शक्तियों के निशान थे। जो अलग-अलग रंगों में चहकते थे। वो अजीब जानवर बहुत ज्यादा अजीब था। क्योंकि उसके पास देवताओं से भी ज्यादा ताकत और त्रिदेवों से भी ज्यादा ताकतवर था। वो अजीब जानवर बाकी जानवरों से बहुत ही ज्यादा अलग था। वो अजीब जानवर दिखने में भयावह था। उसकी एक आंख लाल तो दूसरी सतरंगी थी। उसके सिर पर बारे रंगों का ताज था। दिखने में थोड़ा-बहुत इंसानों जैसा था। लेकिन उसमें किसी देवताओं से भी ज्यादा ताकतों का मालिक था। जब वो अजीब जानवर बाहर आया था। तब वो बेकाबू था। उसने पूरे ब्रह्मांड पर तबाही मचा दी थी। उसके सामने जो भी आता वो एक सांस में उसके चिथड़े-चिथड़े हो जाते। देवताओं उस अजीब जानवर से बचने के लिए छुप गए थे। क्योंकि वो ब्रह्माण्ड का कोना-कोना तहस-नहस कर रहा था। उस देवताओं में त्रिदेव और त्रिदेवियां भी शामिल थी। त्रिदेव और त्रिदेवियां के देवताओं ने मिलकर उस अजीब जानवर रोकने कि कोशिश कि। लेकिन वो भी उस अजीब से जानवर कि एक दहाड़ से हार गए थे। माँ काली को समझ आया कि वो जानवर माँ का प्यार ढूंढ़ रहा है। तब उन्होंने उस अजीब जानवर को शांत कराके अपना पुत्र बना लिया। उस अजीब जानवर को काली मां ही काबू कर सकतीं थी। वो भी अपनी ममता से। नहीतर वो जानवर सबकुछ तबाह कर देता था।