
Saatvi Peedhi
आधी रात को अर्जुन की नींद एक डरावने सपने से खुलती है, जहाँ एक रहस्यमयी आवाज़ उसे दादा के पुराने कर्ज की याद दिलाती है। तभी उसका फ़ोन खुद-ब-खुद जल....
आधी रात को अर्जुन की नींद एक डरावने सपने से खुलती है, जहाँ एक रहस्यमयी आवाज़ उसे दादा के पुराने कर्ज की याद दिलाती है। तभी उसका फ़ोन खुद-ब-खुद जल उठता है, स्क्रीन पर चमकता है एक संदेश: "कर्ज वापस करो!" और फिर एक और, "सातवीं पीढ़ी का समय शुरू हो चुका है!" कमरे की बत्तियाँ टिमटिमाती हैं और अँधेरे में एक बूढ़ा आदमी खड़ा है, जिसकी आँखों की जगह सिर्फ काला अँधेरा है। वह खुद को अर्जुन का दादा बताता है, जो बीस साल पहले मर चुका है, और कहता है कि मौत का सौदा अब चुकाना होगा। दीवारों पर खून से लिखे संदेश उभरते हैं, पिछली छह पीढ़ियों के अंत की कहानी बताते हुए। अर्जुन के हाथ में अचानक वही काला सिक्का आ जाता है, जिस पर एक जलती हुई आँख बनी है, और बाहर से आती डरावनी दस्तकें उसे चेतावनी देती हैं: "दरवाजा मत खोलना!" लेकिन जब एक अदृश्य आवाज़ उसे दादा के गाँव जाने और सिक्के को बचाने का आदेश देती है, तो अर्जुन को समझ नहीं आता कि यह सब क्या है। क्या यह सिर्फ एक बुरा सपना है, या उसके परिवार पर मंडरा रहा कोई प्राचीन अभिशाप? और कौन है यह "मालिक" जो मौत का कर्ज वसूलने आया है?